संस्‍कृतजगत्

संस्‍कृत सहायता प्रकोष्‍ठ | SANSKRIT HELP FORUM

Neeraj kant

हिंदी अर्थ

द्वैमातुर कृपासिन्धो! षाष्मातुराग्रज प्रभो।
वरद त्वं वर देहि वांछितं वांत्रिछतार्थद।।
अनेन सफलार्ध्येण फलदांऽस्तु सदामम।।

समय : 03:54:16 | दिनाँक : 27/03/2020
उत्‍तर दें
X

प्रश्‍न पूँछें

X