विवार किस तरह का प्रयत्न है और इसके अन्तर्गत कौन-कौन से वर्ण आते हैं, कृपया बतायें ।<br />
प्रयत्नों के कुल कितने प्रकार हैं यह भी बताने का कष्ट करें ।<br />
धन्यवाद
टिप्पणियाँ
शिवेश31/07/2019 | 01:16:42
प्रयत्न कुल दो प्रकार के होते हैं <br />
1. आभ्यन्तर प्रयत्न <br />
2. बाह्य प्रयत्न<br />
आभ्यन्तर प्रयत्न पांच प्रकार का होता है (स्पृष्ट, ईषत्स्पृष्ट, ईषद्विवृत, विवृत और संवृत), जबकि बाह्य प्रयत्न ग्यारह प्रकार का होता है (विवार, संवार, श्वास, नाद, घोष, अघोष, अल्पप्राण, महाप्राण, उदात्त, अनुदात्त और स्वरित) ।<br />
विवार प्रयत्न खर् (क, ख, च, छ, ट, ठ, त, थ, प, फ, श, ष तथा स) वर्णों का होता है ।<br />
इसके लिये सूत्र भी है - <br />
<br />
<b>खरो विवारा श्वासा अघोषाश्च ।<br />
हशो संवारा नादा घोषाश्च ।।</b><br />
<br />
अर्थात् खर् (क, ख, च, छ, ट, ठ, त, थ, प, फ, श, ष तथा स) वर्णों का प्रयत्न विवार, श्वास और अघोष होता है जबकि हश् (ग, घ, ड., ज, झ, ञ, ड, ढ, ण, द, ध, न, ब, भ, म, य, र, ल, व तथा ह) वर्णों का प्रयत्न संवार, नाद और घोष होता है ।<br />
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1. आभ्यन्तर प्रयत्न <br />
2. बाह्य प्रयत्न<br />
आभ्यन्तर प्रयत्न पांच प्रकार का होता है (स्पृष्ट, ईषत्स्पृष्ट, ईषद्विवृत, विवृत और संवृत), जबकि बाह्य प्रयत्न ग्यारह प्रकार का होता है (विवार, संवार, श्वास, नाद, घोष, अघोष, अल्पप्राण, महाप्राण, उदात्त, अनुदात्त और स्वरित) ।<br />
विवार प्रयत्न खर् (क, ख, च, छ, ट, ठ, त, थ, प, फ, श, ष तथा स) वर्णों का होता है ।<br />
इसके लिये सूत्र भी है - <br />
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<b>खरो विवारा श्वासा अघोषाश्च ।<br />
हशो संवारा नादा घोषाश्च ।।</b><br />
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अर्थात् खर् (क, ख, च, छ, ट, ठ, त, थ, प, फ, श, ष तथा स) वर्णों का प्रयत्न विवार, श्वास और अघोष होता है जबकि हश् (ग, घ, ड., ज, झ, ञ, ड, ढ, ण, द, ध, न, ब, भ, म, य, र, ल, व तथा ह) वर्णों का प्रयत्न संवार, नाद और घोष होता है ।<br />