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प्रश्नकर्ता: Akhilesh | 24/11/2020 | 02:49 PM

समुद्रप्त्ंयोजल सन्नीपाते पूतात्मानामत्र किलामिषेकात तत्वाबोधेन विनापि मूयस तनुत्यजा नास्ति शरीरब्न्ध्य का हिंदी मे अर्थ <br />
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टिप्पणियाँ
डॉ. विवेकानन्द पाण्डेय17/12/2020 | 09:45 PM
आपके श्लोक में अत्यन्त ही वर्तनीदोष हैं जिससे अर्थ कथमपि स्पष्ट नहीं हो पा रहा है । कृपया शुद्ध श्लोक लिखने का प्रयास करें ।<br />
आपकी पूरी सहायता की जाएगी ।