वैसे तो बिना पूरा मंत्र जाने केवल आधे का या चौथाई का अनुवाद अनुचित व अपूर्ण होता है किन्तु पुनश्च अनुवाद कर रहा हूँ -<br />
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ज्योतिः प्रदिशो (प्रदिर्शो त्रुटिपूर्ण लग रहा है) दिशान्तः<br />
दिशाओं के छोरों व प्रदिशाओं (दिशाओं के कोनों) तक प्रकाश फैले अथवा प्रकाशित हों I<br />
ये संभावित अनुवाद है I मंत्र की विवक्षा में गलत भी हो सकता है I
डॉ. विवेकानन्द पाण्डेय21/05/2021 | 07:39 PM
यदि प्रदिर्शो के स्थान पर प्रदर्शो मान लिया जाए तो फिर इसका अर्थ हो जाएगा दिशाओं के अंत तक ज्योति या प्रकाश दिखे (फैले) I
टिप्पणियाँ
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ज्योतिः प्रदिशो (प्रदिर्शो त्रुटिपूर्ण लग रहा है) दिशान्तः<br />
दिशाओं के छोरों व प्रदिशाओं (दिशाओं के कोनों) तक प्रकाश फैले अथवा प्रकाशित हों I<br />
ये संभावित अनुवाद है I मंत्र की विवक्षा में गलत भी हो सकता है I