सत्यमेव जयते। यहा जयते व्याकरण दृष्टी से कैसे योग्य है?
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डॉ. विवेकानन्द पाण्डेय09/07/2021 | 09:42 PM
सत्यमेव जयति नानृतम् – यह मुण्डकोपनिषद् का वाक्य है । जयति शब्द जि धातु से लट् लकार प्र.पु. एकवचन में बनता है । क्यूँकि जि धातु नित्य परस्मैपदी है इसलिये जयते शब्द अशुद्ध है ।<br />
जयते शब्द केवल वि और परा उपसर्ग पूर्वक ही आत्मनेपदी रूप में विजयते और पराजयते बनेगा ।<br />
इस तरह शुद्ध वाक्य है – सत्यमेव जयति अथवा सत्यमेव विजयते ।<br />
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जयते शब्द केवल वि और परा उपसर्ग पूर्वक ही आत्मनेपदी रूप में विजयते और पराजयते बनेगा ।<br />
इस तरह शुद्ध वाक्य है – सत्यमेव जयति अथवा सत्यमेव विजयते ।<br />